फिर जनम लेंगे हम, नसीमा
फिर जनम लेंगे हम , नसीमा दक्षिण समाचार , 23 दिसंबर 1998 तेलुगु मूल : पाटिबंडला रजनी हिंदी अनुवाद : प्रो. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू मानवहार बनी थीं हम डालकर गलबहियाँ एक लय से एक कदम से मनुष्य और मनुष्य के हाथों में हाथ आने पर , मन से मन मिलाकर मिट्टी के सने परिमल से खुश हुई थीं। अचरच हुआ था जानकर हमारे जन्म से पूर्व औलाद की आस में जाने कितनी बार तुम्हारी माँ ने मंदिर के पीपल पर झूले बाँधे और पीर के जलूस में आँचल पसारा था मेरी माँ न...