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Sri Ram Charit Manas, Ayodhya kand 101, कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेहिं तव नाव न जाई ॥ गोस्वामी तुलसीदास.
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Kafan, कफन : भारतीय ज्ञान प्रणाली और समकालीन प्रासंगिकता, प्रेमचंद जयंती, Premchand Jayanti Special,
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 300, कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 299, बाँधें बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 298, भूप भरत पुनि लिए बोलाई।हय गय स्यंदन साजहु जाई॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 297, जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल ॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 296, कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 295, राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाचि सुनाई॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Prof. Nirmala S Maurya, हिन्दी जगत् की प्रख्यात शिक्षाविद् एवं दूरदर्शी प्रशासक: आचार्य निर्मला एस. मौर्य
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Prof. Nirmala S Maurya, हिन्दी जगत् की प्रख्यात शिक्षाविद् एवं दूरदर्शी प्रशासक: आचार्य निर्मला एस. मौर्य आचार्य एस.वी.एस.एस.नारायण राजू आचार्य निर्मला एस. मौर्य हिन्दी भाषा एवं साहित्य की सुप्रसिद्ध विदुषी , प्रख्यात शिक्षाविद् , प्रमुख कवयित्री, दूरदर्शी प्रशासक तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं. उन्होंने अपने दीर्घ एवं गौरवशाली अकादमिक जीवन में अध्यापन , शोध , प्रशासन , भाषा-संवर्धन तथा शैक्षिक नेतृत्व के माध्यम से भारतीय उच्च शिक्षा जगत् में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है. उनका सम्पूर्ण जीवन ज्ञान , अनुशासन , सेवा , नैतिक मूल्यों तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति समर्पित रहा है. हिन्दी भाषा के विकास , भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा शोधपरक अकादमिक परम्पराओं के संवर्धन में उनके योगदान को देशभर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है. उनका जन्म 5 अगस्त 1958 ( उन्नीस सौ अट्ठावन) को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ. प्रारम्भ से ही वे मेधावी , अध्ययनशील तथा ज्ञान-पिपासु रहीं. साहित्य , संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति उनकी गहरी अभिरुचि ने उन्ह...
Sri Ram Charit Manas, Bal kand 294, सुनि बोले गुर अति सुख पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई ॥ जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं ॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sursagar, Gokul leela 106, मैया री, मोहिं माखन भावै। जो मेवा पकवान कहति तू, मोहिं नहीं रुचि आवै। सूरदास
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Sursagar, Gokul leela 106, मैया री, मोहिं माखन भावै। जो मेवा पकवान कहति तू, मोहिं नहीं रुचि आवै। सूरदास आचार्य एस.वी.एस.एस. नारायण राजू. प्रसंग भक्तिकाल के महान कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित सूरसागर के प्रस्तुत पद श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध माखन-लीला से संबंधित है. बालकृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय है. माता यशोदा उन्हें मेवा , मिठाई और विविध पकवान खाने के लिए प्रेरित करती हैं , किन्तु कृष्ण स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उन्हें केवल माखन ही अच्छा लगता है. उसी समय एक गोपी यह वार्तालाप सुन लेती है और उसके मन में यह अभिलाषा जागती है कि काश! कृष्ण उसके घर भी माखन चुराने आएँ और वह उन्हें चोरी-चोरी माखन खाते हुए देख सके. भगवान कृष्ण अंतर्यामी हैं , इसलिए वे गोपी के मन की इस छिपी हुई इच्छा को जान लेते हैं. इस पद में कृष्ण की बाल-लीला , गोपी की भक्ति तथा भगवान की भक्तवत्सलता का अत्यंत सुंदर चित्रण किस प्रकार किया है, अब सूरदास जी के शब्दों में पद और पद की व्याख्या देखेंगे. पद मैया री , मोहिं माखन भावै। जो मेवा पकवान कहति तू , मोहिं नहीं रुचि आवै। ब्रज-जुवती इक पाछै ठाढ़ी ,...
Sri Ram Charit Manas, Bal kand 293, सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sursagar, Gokul leela 105, कहत नन्द, जसुमति सौं बात। कहा जानिए कह तै देख्यौं, मेरैं कान्ह रिसात। सूरदास.
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Sursagar, Gokul leela 105, कहत नन्द, जसुमति सौं बात। कहा जानिए कह तै देख्यौं, मेरैं कान्ह रिसात । सूरदास. आचार्य एस.वी.एस.एस. नारायण राजू. प्रसंग भक्तिकाल के महान कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित सूरसागर के प्रस्तुत पद कृष्ण की बाल-लीलाओं से संबंधित है. माटी-भक्षण प्रसंग तथा अन्य बाल-चेष्टाओं के कारण कभी-कभी माता यशोदा कृष्ण को डाँट देती हैं या उन्हें दंडित करने का प्रयास करती हैं. इस स्थिति को देखकर नन्द बाबा यशोदा को समझाते हैं कि कृष्ण अभी बहुत छोटे और कोमल बालक हैं. वे यशोदा को उनकी अत्यधिक ममता और कभी-कभी होने वाली कठोरता के बीच संतुलन रखने का उपदेश देते हैं. इस पद में नन्द के पितृस्नेह , यशोदा के वात्सल्य तथा कृष्ण की बाल-निष्कपटता का अत्यंत सुंदर चित्रण सूरदास जी ने किस प्रकार चित्रित किया है, अब सूरदास जी के शब्दों में पद और पद की व्याख्या देखेंगे. पद कहत नन्द , जसुमति सौं बात । कहा जानिए कह तै देख्यौं , मेरैं कान्ह रिसात । पाँच बरष को मेरौ कन्हैया , अचरज तेरी बात । बिनहिं काज साँटि ले धावति , ता पाछे बिललात । कुसल रहैं बलराम स्याम दोउ , खेलत-खात-अन्हात । सूर स्याम क...