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Sursagar, Gokul leela 62, आनंदै आनंद बढ्यो अति। देवनि दिवि दुंदभी बजाई, सुनि मथुरा प्रगटे जादवपति। सूरदास
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Sursagar, Gokul leela 62, आनंदै आनंद बढ्यो अति। देवनि दिवि दुंदभी बजाई , सुनि मथुरा प्रगटे जादवपति। सूरदास. आचार्य. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू प्रसंग भक्तिकाल के महान कृष्णभक्त कवि सूरदास द्वारा रचित सूरसागर के प्रस्तुत पद में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म (प्राकट्य) के अवसर का अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण वर्णन किया गया है. जब कंस के अत्याचारों से पीड़ित पृथ्वी , देवता और समस्त प्राणी भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं , तब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में अवतरित होते हैं. उनके जन्म का समाचार सुनकर सम्पूर्ण सृष्टि आनंदमग्न हो उठती है. देवता , गंधर्व , किन्नर , विद्याधर , ऋषि-मुनि तथा समस्त देवांगनाएँ उत्सव मनाने लगती हैं. इस अलौकिक और दिव्य वातावरण का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किस प्रकार किया है, कवि सूरदास जी के शब्दों में पद और पद की व्याख्या अब देखेंगे. पद आनंदै आनंद बढ्यो अति । देवनि दिवि दुंदभी बजाई , सुनि मथुरा प्रगटे जादवपति । विद्याधर-किन्नर कलोल मन उपजावत मिली कंठ अमित गति ...
Sri Ram Charit Manas, Bal kand 63, पिता भवन जब गईं भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमा॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Hajari Prasad Dwivedi, Indian Culture, भारतीय संस्कृति के आलोक में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी .
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 62, कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Vision of Ramarajya: global peace,राम राज्य की परिकल्पना वैश्विक शाँति, Ramalayam foundation webinar
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Sri Ram Charit Manas, Bal kand 61, किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर ॥ गोस्वामी तुलसीदास.
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Sri Ram's Leadership Model: Ethics, Governance, & Human Values, सब में राम शाश्वत श्री राम, Webinar
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The Ideal Leadership of Lord Sri Ram: Relevance in Contemporary Society, सब में राम शाश्वत श्री राम,
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 100, UGC NET HINDI, पर त्रिय लंपट कपट सयाने। मोह॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 99, UGC NET HINDI, नारि बिबस नर सकल गोसाईं। नाचह॥ गोस्वामी तुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धा सर्ग 62, विश्व की दुर्बलता बल बने, पराजय का बढ़ता, UGC NET Hindi, जयशंकर प्रसाद.
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 98, UGC NET HINDI, बरन धर्म नहिं आश्रम चारी। ॥ गोस्वामी तुलसीदास.
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कामायनी, श्रद्धा सर्ग 61, जलधि के फूटें कितने उत्स, द्वीप-कच्छप डूबें, UGC NET Hindi, जयशंकर प्रसाद.
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 97, UGC NET HINDI, तेहिं कलिजुग कोसलपुर जाई। जन्म॥ गोस्वामीतुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धा सर्ग 60, उन्हें चिनगारी सदृश सदर्प कुचलती रहे खडी सानन्द, UGCNET Hindi,जयशंकरप्रसाद
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 96, UGC NET HINDI, स्वारथ साँच जीव कहुँ एहा। मन ॥ गोस्वामी तुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धा सर्ग 59, विधाता की कल्याणी सृष्टि सफल हो इस भूतल, UGC NET Hindi, Jayashankar Prasad
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 95, UGC NET HINDI, गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा॥ गोस्वामी तुलसीदास.
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Indian Knowledge System and Kamayani, भारतीय ज्ञान परंपरा और कामायनी, Jayashankar Prasad, IKS
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 94, UGC NET HINDI, सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हर॥ गोस्वामी तुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धासर्ग 58, चेतना का सुन्दर इतिहास - अखिल मानव भावों, UGC NET Hindi, Jayashankar Prasad
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 93, UGC NET HINDI, सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हर॥ गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ram Charit Manas, Uttar kand 92, UGC NET HINDI, प्रभु अगाध सत कोटि पताला। समन॥ गोस्वामी तुलसीदास
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6th Anniversary Special, Sri Ramcharit Manas, Uttarkand 91, निज मति सरिस नाथ मैं, गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 100, अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भ, गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 99, तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा स, गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 98, सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस, गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 97, प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं,गोस्वामी तुलसीदास
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 96, अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका,गोस्वामी तुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धासर्ग 57, देव-असफलताओं का ध्वंस प्रचुर उपकरण जुटाकर, UGC NET Hindi, JayashankarPrasad
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 95, देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी,गोस्वामीतुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धासर्ग 55, और यह क्या सुनते नहीं विधाता का मंगल वरदान, UGCNETHindi, Jayashankar Prasad
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 94, आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मो, गोस्वामी तुलसीदास
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कामायनी, श्रद्धासर्ग 54, बनो संसृति के मूल रहस्य, तुम्हीं से फैले, UGC NET Hindi, Jayashankar Prasad
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Sri Ramcharit Manas, Lanka Kand 93, दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस, गोस्वामी तुलसीदास
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Personality development, श्री रामचरित मानस - भारतीय ज्ञान परंपरा और व्यक्तित्व विकास( लंका कांड) IKS
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