Sri Ram Charit Manas, Bal kand 294, सुनि बोले गुर अति सुख पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई ॥ जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं ॥ गोस्वामी तुलसीदास

 

Sri Ram Charit Manas, Bal kand 294, 




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