Sri Ram Charit Manas, Ayodhya kand 102, उतरि ठाढ़ भए सुरसरि रेता। सीय रामु गुह लखन समेता ।। केवट उतरि दंडवत कीन्हा। प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा ॥ गोस्वामी तुलसीदास


 

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