Sri Ram Charit Manas, Ayodhya kand 103, तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा ॥ सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। मातु मनोरथ पुरउबि मोरी ॥ गोस्वामी तुलसीदास


 

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