“कहीं गाँव का देशीपन है तो कहीं शहर के किसी कामगार का भाव”: खिली-खिली है नागफनी

 

कहीं गाँव का देशीपन है तो कहीं शहर के किसी कामगार का भाव”: खिली-खिली है नागफनी

   आचार्य. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू

गीत का मन गीत का स्वर: ईश्वर करुण

संपादक  : राहुल शिवाय

ISBN: 978-81-991715-3-4

Year: 2025

 ईश्वर करूण का काव्य संग्रह ‘खिली-खिली है नागफनी’ 46 कविताओं का एक संग्रह है, जिसमें उन्होंने बुलबुल के खंजन से लेकर, विस्थापन के दर्द तक को अभिव्यक्त किया है. इस संग्रह के माध्यम से उन्होंने मनुष्य की भावात्मक अनुभूतियों को उकेरने का कार्य किया है.

वीर बहादुर सिंह पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय की भूतपूर्व कुलपति प्रो. निर्मला एस.मौर्य इस काव्य संग्रह के संदर्भ में लिखती हैं कि -  “ओज पूर्ण भाषा में कवि जापान की धरती पर हिंदुस्तानी भाला के गरजने की बात करते हैं तो कहीं कविधर्म और कवि ईमानदारी की चर्चा करते हैं. परिवार के जुड़ने पर घर के खुश होने, चौकी, पीढा, कुर्सी और खटोले के खुश होने का जिक्र कहीं मन को द्रवित कर जाता है. निर्जीव वस्तुओं का मानवीकरण कवि की संप्रेषण शक्ति को और भी धारदार बनाता है. विदेश में बसे बच्चों का अपने गांव-घर आना और फिर वापस लौट जाना माता-पिता को कहीं अंदर तक दुखी कर जाता है किंतु बच्चों के अच्छे भविष्य की खुशियों में वह भी अपनी खुशियां देख लेते हैं.

गीत और लोकजीवन का अटूट संबंध है. गीत की वास्तविक भावभूमि और उसका केन्द्रबिन्दु ‘लोक’ ही है. ईश्वर करून ने अपने कविता संग्रह ‘खिली-खिली है नागफनी’ में ग्राम्य गीतों की ओर अधिक ध्यान दिया है. कवि को कास के विस्तृत मैदान मोह लेते हैं. उनका मन कास के फूल को देखकर झूमने लगता है. कवि का ग्रामीण मन आनंदित होकर गाने लगता है -

“आओ चलें बजाएँ माँदल

कास पुष्प के बीच

ले आएँ फिर हम दोनों कुछ

सींकी और गुरीच.

कवि गाँव के खेत-खलिहान से निकलकर गाँव से विस्थापित हुए लोगों की चिंता का वर्णन अपनी कविता में व्यक्त करते हुए लिखते हैं कि –

“लौट चला बंजारा फिर से

चेन्नै की सड़कों-गलियों में

कलकत्ता की सड़कें नापी

पार्क स्ट्रीट का कोना-कोना.”

दक्षिण के राज्य खासकर तमिलनाडु को लेकर लोगों के मन में हिन्दी भाषा को लेकर जो पूर्वाग्रह है, कवि ने उस पूर्वाग्रह को अपने यथार्थ मनोभावों के माध्यम इस प्रकार तोड़ा है –

“तमिलनाडु में सिद्ध पुलिस को

हिन्दी में बतियाते देखा

हिन्दी भाषी बंधुजनों को

निर्भय आते-जाते देखा.”

कवि अपने कविता के माध्यम से किस प्रकार अपवाहों और पूर्वाग्रह को जनता के अंतर्मन से दूर कर सकता है, यह इन पंक्तियों के माध्यम से समझा जा सकता है.

वर्तमान समय में अधिकांशतः लोग रोजगार के कारण शहर में निवास करते हैं. बच्चों की स्कूल की छुट्टियों में वे गाँव की ओर रुख करते हैं. कुछ दिनों में छुट्टियाँ बिताकर वे फिर शहर लौट जाते हैं, ईश्वर करूण अपनी कविता में इस संदर्भ का वर्णन कुछ इस प्रकार करते हैं –

“लौट गए परदेसी बच्चे

अपने-अपने ठाँव

व्रत-पूजा में आए थे तब

भरा-भरा घर था

यहाँ-वहाँ रौनक पसरा

घर तीर्थ मनोहर था.”

बच्चों के घर आने से गाँव में दादा-दादी अत्यंत प्रसन्न रहते हैं, लेकिन जब बच्चें शहर चले जाते हैं तो घर में सूनापन फैल जाता है. ईश्वर करूण ने इस कविता के माध्यम से वर्तमान युग के यथार्थ स्थिति को चित्रित किया है.

आधुनिक समय में मनुष्य का अहम भाव सर्वोपरि है, वह अपने से भिन्न कुछ सोचना नहीं चाहता. उसे केवल अपने ‘मैं’ की चिंता है. कवि इस स्थिति को अपनी कविता में कुछ इस प्रकार व्यक्त करते हैं कि –

“भग्न कोठियों के वैभव को

कौन करेगा याद

सबको अपनी-अपनी चिंता

अपने गौरव गान

अपना घर, अपने उदाहरण

अपना ही सम्मान

हम ही हैं पांती में आगे

सभी हमारे बाद.”

कवि ने अपनी कविता ‘मिलती नहीं हजामिन दीदी’ के माध्यम से शहर में कामगरों की अपर्याप्तता और शहर में रहकर गाँव को स्मृतियों में बसाने वाले सहृदय का जिक्र किया है. शहर में बगीचे हैं, झूले हैं लेकिन वह भाव नहीं है जो गाँव में अपने बचपन के दोस्तों के साथ बैठकर आता था. शहर में जीवन बस ऑफिस तक सीमित होकर रह जाता है. कवि लिखते हैं कि –

“मन रोता है ऑफिस जाकर

कोनेवाली ठाँव में

यूट्यूब पर कभी-कभी

इक कजरी चुन लेता है

कागजवाली नाव सोचकर

माथा धुन लेता है.”

वर्तमान युग में शहर में दादी-नानी के किस्से उनके द्वारा गायी जाने वाली कजरी सुनने को नहीं मिलती. कवि डिजिटल युग में यूट्यूब जैसे माध्यमों का उल्लेख करते हैं.

कवि ईश्वर करुन ने अपने कविता संग्रह ‘खिली-खिली है नागफनी’ के माध्यम से वर्तमान समय के यथार्थ को उकेरने का कार्य किया है. उन्होंने अपने कविता के द्वारा अपने संघर्ष को जनता का संघर्ष बना दिया है. हर एक कविता अपने-आप में एक कथा कहती चलती है. कहीं गाँव का देशीपन झलकता है तो कहीं शहर के किसी कामगार का भाव.


 

 

 

 

 

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