Sri Ram Charit Manas, Bal kand 289, रचे रुचिर बर बंदनिवारे,मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे, गोस्वामीतुलसीदास


 

Comments

Popular posts from this blog

“कबीर के दृष्टिकोण में गुरु”

कोमल गांधार में चित्रित “गांधारी” के विभिन्न आयाम