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कोमल गांधार में चित्रित “गांधारी” के विभिन्न आयाम
शब्द विधान ISSN : 2394 - 0670 अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक अनुसंधान पत्रिका January -March & April - June 2015 कोमल गांधार में चित्रित “ गांधारी ” के विभिन्न आयाम प्रो.एस.वी.एस.एस.नारायण राजू आधुनिक युग में विज्ञान के विकास से प्राप्त वैज्ञानिक चिंतन-पध्दति के कारण अंग्रजों की सभ्यता और संस्कृति के प्रभाव के कारण नारी जीवन में काफी बदलाव आया. नारी के अपने दृष्टिकोण में, मूल्य चिंतन में भी परिवर्तन आया. अब वह भी वैयक्तिक स्वतंत्रता की महत्ता को पहचान कर मनोवांचित दिशा में अग्रसर हो रही है. पर नारी जीवन की यह विडंबना है कि पुरुष सत्तात्मक समाज में पारिवारिक जीवन में भी नहीं वैयक्तिक जीवन में भी शोषण का शिकार हुए बिना अंतर्बाह्य यातनाओं से ग्रस्त हुए बिना अपनी कोई विशेष छवि इतिहास के पत्रों पर अंकित करने में सफल नहीं है, चाहे वह शिक्षित हो या अशिक्षित, उच्च वर्ग की हो या निम्न वर्ग की. नाटककार ड़ॉ. शंकर शेष ने कोमल गांधार नाटक के माध्यम से भारतीय समाज में परंपरा से ग्रस्त हुई नारी जीवन की आंतरिक एवं बाह्य स्थिति से संबंधित ...
“कबीर के दृष्टिकोण में गुरु”
“ कबीर के दृष्टिकोण में गुरु ” प्रो. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू पूर्णकुंम्भ – साहित्यिक मासिक पत्रिका मई - 2002 भक्तिकालीन सभी सन्तों में से कबीर की वाणी सबसे अधिक सशक्त एवं सक्षम है. कबीर ने तत्कालीन समस्त धर्म साधनाओं, उपासना- पद्धतियों साधना प्रणालियों आदि का गहन अध्ययन करके अपने विचार प्रकट किए हैं. साथ ही वे उच्चकोटि के साधक भी रहे हैं. कबीर का साहित्य जन-जीवन को उन्नत बनानेवाला है, मानवता का पोषक है, विश्व बन्धुत्व की भावना को जाग्रत करनेवाला है. कबीर की साधना में “ गुरु ” को अत्यधिक महत्व प्रदान किया गया है. कबीर की दृष्टि में गुरु “ गोविन्द ” से भी बढ़कर है, क्योंकि “ हरि रुँठे गुरु ठौर है, गुरु रुँठे नहिं ठौर ” कहकर कबीर ने गुरु को सबसे बडा आश...
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