Sri Ram Charit Manas, Bal kand 61, किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर ॥ गोस्वामी तुलसीदास.


 

Comments

Popular posts from this blog

हिंदी साहित्य में किन्नर विमर्श : पहचान, संघर्ष और सांस्कृतिक संदर्भ

“कबीर के दृष्टिकोण में गुरु”

कोमल गांधार में चित्रित “गांधारी” के विभिन्न आयाम