Posts

संस्कृति : एक परिचय

संस्कृति : एक परिचय                                                  प्रो. एस . वी . एस . एस . नारायण राजू स्रवंति , मई   2005     संस्कृति का कोशार्थ   इस प्रकार है – पूरा करना , शुध्दि , सुधार , परिष्कार , निर्माण , पवित्रीकरण , सजावट , निश्चय , उद्योग , आचरणगत परंपरा , सभ्यता का वह स्वरुप जो आध्यात्मिक एवं मानसिक वैशिष्ट्य का द्योतक होता है ; 24 ( चौबीस ) अक्षरों के वर्णवृत्त। (1) संस्कृति शब्द का प्रयोग दो अर्थों में होता है। एक विस्तृत और एक सीमित अर्थ में होता है। विस्तृत अर्थ में संस्कृति शब्द का प्रयोग नर विज्ञान में किया जाता है। ‘ नर विज्ञान ’ के अनुसार संस्कृति सीखे हुए व्यवहार अथवा सामाजिक परंपरा से प्राप्त होता है। संस्कृति को सामाजिक प्रथा ( custom) का पर्याय भी कहा जाता है...

फिर जनम लेंगे हम, नसीमा

                     फिर जनम लेंगे हम , नसीमा दक्षिण समाचार , 23 दिसंबर 1998                                          तेलुगु मूल : पाटिबंडला रजनी                           हिंदी अनुवाद : प्रो. एस.वी.एस.एस. नारायण राजू मानवहार बनी थीं हम डालकर गलबहियाँ एक लय से एक कदम से मनुष्य और मनुष्य के हाथों में हाथ आने पर , मन से मन मिलाकर मिट्टी के सने परिमल से खुश हुई थीं। अचरच हुआ था जानकर हमारे जन्म से पूर्व औलाद की आस में जाने कितनी बार तुम्हारी माँ ने मंदिर के पीपल पर झूले बाँधे और पीर के जलूस में आँचल पसारा था मेरी माँ न...